Schools Fee Hike: 11 प्राइवेट स्कूलों पर सख्त आदेश! बढ़ी हुई फीस वापस लौटानी होगी।

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Schools Fee Hike: दिल्ली सरकार ने 11 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा है। यह कदम तब उठाया गया जब एसडीएम (सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट) की अगुवाई वाली टीमों ने इन स्कूलों में कई गड़बड़ियां पकड़ीं। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार इन गलतियों पर सख्त कार्रवाई करेगी। यह एक्शन तब आया जब दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका पर आरोप लगा कि उसने फीस न देने वाले बच्चों को लाइब्रेरी में बंद करके रखा और उनके साथ गलत व्यवहार किया।

कोर्ट ने इसकी सख्त आलोचना करते हुए कहा – “बच्चों के साथ संपत्ति जैसा बर्ताव नहीं हो सकता!” यह टिप्पणी एसडीएम की इंस्पेक्शन रिपोर्ट के आधार पर की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा – “स्कूलों को नियमों का पालन करना होगा। गलती करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

स्कूल फीस बढ़ोतरी पर बवाल, सीएम रेखा गुप्ता ने की सख्त कार्रवाई की बात।

इस हफ्ते की शुरुआत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि जो स्कूल मनमर्जी से फीस बढ़ा रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पैरेंट्स ने हाल ही में स्कूल फीस में बेहिसाब बढ़ोतरी को लेकर जोरदार विरोध किया। 9 अप्रैल को, 14 निजी स्कूलों के बच्चों के माता-पिता सस्ती और सबको बराबर शिक्षा की मांग को लेकर शिक्षा विभाग के दफ्तर के बाहर जमा हुए थे।

दिल्ली के 600 से ज़्यादा प्राइवेट स्कूलों की जांच शुरू, डीओई की सख्ती।

दिल्ली में जिन प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर शिकायतें मिली थीं, उनकी जांच अब तेज़ हो गई है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने एसडीएम की अगुवाई में बनी टीमों को यह ज़िम्मेदारी दी है कि वो दिल्ली के प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों का पूरा निरीक्षण करें। अब तक 600 से ज़्यादा स्कूलों की जांच की जा चुकी है।

शिक्षा विभाग का सख्त एक्शन: फीस बढ़ोतरी और फर्जी एडमिशन करने वाले स्कूलों पर शिकंजा!

शिक्षा विभाग ने 10 अप्रैल को एक बयान जारी कर बताया कि जो स्कूल नियम तोड़ रहे हैं, उन्हें “कारण बताओ” नोटिस भेजे गए हैं। इन स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद्द करने से लेकर प्रबंधन को सरकार के हाथ में लेने जैसी कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि, यह फैसला हर स्कूल के केस को अलग से जाँचकर ही लिया जाएगा। साथ ही, इन स्कूलों को तुरंत गैर-कानूनी तरीके से बढ़ाई गई फीस को वापस लेने का आदेश दिया गया है।

एक और बड़ी समस्या पर विभाग ने गौर किया है। कुछ निजी स्कूल (जिन्हें सरकारी फंड नहीं मिलता) “डमी स्कूलिंग” करवा रहे हैं। यानी, बच्चों का एडमिशन तो कर लेते हैं, लेकिन वे असल में क्लास में आते ही नहीं। ऐसे करीब 20 स्कूलों की पहचान हुई है, जिनके खिलाफ अलग से कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

स्कूलों पर RTE नियमों की अनदेखी नहीं चलेगी! गरीब और विशेष ज़रूरत वाले बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने का आदेश”

शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों का निरीक्षण कर रहा है और यह जाँच रहा है कि क्या स्कूल “शिक्षा का अधिकार कानून, 2009” के नियमों को पूरा कर रहे हैं। इस कानून के मुताबिक, सभी स्कूलों को गरीब परिवारों, पिछड़े वर्गों और दिव्यांग बच्चों को मुफ़्त किताबें, यूनिफ़ॉर्म और पढ़ाई का सामान देना कानूनन अनिवार्य है। विभाग ने साफ़ कहा है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों को नहीं मानता, तो उसे गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और उस पर नज़र रखी जाएगी।

इसके अलावा, विभाग ने दोबारा याद दिलाया है कि दिल्ली के सभी निजी स्कूलों (जिन्हें सरकारी फंड नहीं मिलता) को दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के नियमों का पालन करना होगा। खासतौर पर फीस से जुड़े मामलों में अभिभावकों के साथ हर बातचीत पूरी तरह साफ़ और पारदर्शी होनी चाहिए। यानी, फीस बढ़ाने या किसी चार्ज के बारे में स्कूल को पहले से स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

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