RCB के इंतजार में प्लान की डकैती! 53 करोड़ का सोना और टोटकों वाला बैंक मैनेजर।

C K
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Loot: 50 करोड़+ के गहनों वाली फर्राटेदार चोरी! पूरा खेल था बैंक लॉकर की नकली चाबियों का। सबसे ज़्यादा हैरानी वाली बात? चोरों ने IPL में RCB के जीतने का इंतज़ार भी किया। पढ़िए इस पक्के प्लान की पूरी कहानी।

विजयपुरा के बैंक में काला जादू? 58 किलो सोने की ऐतिहासिक डकैती।

मनगुली (विजयपुरा जिला), कर्नाटक, 25 मई 2025: सोमवार की सुबह कर्नाटक के विजयपुरा जिले के मनगुली इलाके में पुलिस को एक चौंकाने वाली खबर मिली। स्थानीय केनरा बैंक शाखा में रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर सोने की डकैती हुई थी। अज्ञात अपराधियों ने बैंक में घुसकर लगभग 58.97 किलोग्राम सोने के गहने चुरा लिए, जिनकी अनुमानित कीमत 53 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह घटना देश की सबसे बड़ी बैंक लूटपाट की घटनाओं में शुमार हो गई है।

डकैती की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। इलाके में तैनात पुलिस वाहनों के सायरन गूंज उठे और जांच की कार्रवाई तेजी से शुरू हुई। तफ्तीश में पता चला कि डकैतों ने बैंक में घुसने से पहले बिजली और सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिए थे। उन्होंने खिड़की की ग्रिल को हटाकर बिना कोई शोर मचाए या ताला तोड़े, लॉकर से सोना निकाल लिया। मौके पर कोई औजार या गैस कटर जैसा सामान नहीं मिला, जो उनकी सावधानीपूर्वक योजना की ओर इशारा करता है।

हालांकि, जांचकर्ताओं को लॉकर के पास कुछ अजीबोगरीब सामान बिखरा हुआ मिला – केसर, हल्दी, एक काली रंग की गुड़िया और एक ब्लोटॉर्च। इन चीजों को देखकर लग रहा था मानो अपराधियों ने गहने चुराने से पहले तांत्रिक क्रियाएं या काले जादू जैसा कोई अनुष्ठान किया हो। इस रहस्यमयी सबूत ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है।

पुलिस अब सुरागों की तलाश में जुटी है। डकैतों के रास्ते, उनकी संख्या और इस सोची-समझी लूटपाट में शामिल गिरोह के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाने का प्रयास चल रहा है। इस बेशर्म घटना ने न सिर्फ बैंक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि काले जादू जैसे तत्वों को शामिल करके एक नया ही आयाम जोड़ दिया है। विजयपुरा का यह शांत इलाका अचानक देश की निगाह में आ गया है, जहां रातोंरात करोड़ों की संपत्ति गायब हो गई और सिर्फ अंधविश्वास के निशान छोड़ गई।

बैंक मैनेजर ही था डकैत! सोने की लूट में अंदरूनी साजिश का खुलासा।

विजयपुरा, 26 मई 2025: पुलिस की जांच में हैरान करने वाला मोड़ आया। डकैती वाली रात सीसीटीवी बंद होने के बावजूद, आसपास के कैमरों की छानबीन की गई। तभी एक सुराग हाथ लगा – डकैती से कुछ घंटे पहले और बाद में एक शक भरी कार वहां आती-जाती दिखी। जब इस कार का पता चला तो पुलिस के होश उड़ गए।

कार थी उसी बैंक के मैनेजर विजयकुमार मिरियाला की, जिसका ट्रांसफर डकैती से ठीक पहले इस ब्रांच से हुआ था! पुलिस ने तुरंत मिरियाला को पकड़ा और जब जोरदार पूछताछ हुई तो उसने सब कुछ कबूल कर लिया।

सच्चाई ये थी कि ट्रांसफर मिलने के बाद मिरियाला ने सोचा – “जाने से पहले एक बड़ा मौका मार लूँ।” उसे बैंक के हर कोने, हर सुरक्षा सिस्टम की जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल करके उसने दो साथियों के साथ मिलकर ये प्लान बनाया। उसने हर वो तरकीब अपनाई जिससे पुलिस उस पर शक न करे। मगर कार का सीसीटीवी फुटेज उसकी चाल खोल गया।

पुलिस की आठ टीमों की मेहनत रंग लाई और मैनेजर समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। ये साबित हो गया कि ये कोई बाहर का काम नहीं, बल्कि बैंक के अंदर बैठे शख्स की साजिश थी।

ट्रांसफर का फायदा और चाबी की चालाकी!

विजयपुरा, 27 मई 2025: डकैती की पूरी कहानी सामने आई तो पता चला – ये सब बैंक मैनेजर विजयकुमार मिरियाला के “ट्रांसफर का इंतजार” वाले प्लान का हिस्सा था!

दरअसल, मिरियाला पहले मनगुली ब्रांच का मैनेजर था। 9 मई को उसका ट्रांसफर दूसरी ब्रांच हो गया। ट्रांसफर मिलते ही उसके दिमाग में ख्याल आया – “अब तो जाना ही है, बैंक में पड़े करोड़ों के सोने को क्यों न हथिया लूँ?”

उसने दो दोस्तों – चंद्रशेखर नेरेला और सुनील नरसिम्हालु मोका को साथ मिलाया। प्लान साफ था: डकैती तभी करनी है जब मिरियाला का ट्रांसफर हो चुका हो। ऐसा इसलिए ताकि शक उस पर न जाए!

चालाकी ये की:

  • ट्रांसफर का आदेश मिलने के बाद (मार्च-अप्रैल में ही), मिरियाला ने बैंक की असली चाबियां अपने साथियों को दे दीं।
  • दोनों ने फटाफट नकली चाबियां (डुप्लीकेट) बनवा लीं।
  • मिरियाला ने खुद ही ये चाबियां लॉकर में लगाकर टेस्ट भी कर लिया – काम करती हैं या नहीं!

यानी, ट्रांसफर से पहले ही चाबी की नकल बनाकर और उसे चेक करके, उन्होंने डकैती की पहली सीढ़ी पार कर ली थी। पुलिस को अब ये भी पता चल गया कि ये लूट कितनी बारीकी से प्लान की गई थी।

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