Rachin Ravindra: युवा क्रिकेटर रचिन रवींद्र ने अपने करियर की शुरुआत में ही बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। अभी हाल ही में, उन्होंने आईसीसी टूर्नामेंट्स में न्यूजीलैंड के लिए सबसे अधिक शतक जड़ने का नया रिकॉर्ड बना दिया है। जैसे-जैसे रचिन नए मुकाम छू रहे हैं, क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स के बीच उनके नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, उनके नाम ‘रचिन’ की उत्पत्ति दो भारतीय क्रिकेट लीजेंड्स — राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के नाम से जुड़ी हुई है। इन दोनों के नाम के पहले अक्षरों को मिलाकर ही उनका नाम रखा गया है। यह बात उन्हें और भी खास बनाती है, खासकर जब वह मैदान पर अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींच रहे हैं।
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Rachin Ravindra का जन्म कहां हुआ था?
यहाँ निचे आपको रचिन रविंद्र के जीवन से जुड़ी सभी जानकारी देखने को मिल जाएगी –
रचिन रविंद्र की कहानी-
रचिन रविंद्र का जन्म 18 नवंबर 1999 को न्यूज़ीलैंड के वेलिंगटन में हुआ। उनके पिता रवि कृष्णमूर्ति बेंगलुरु से हैं और एक सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट थे, जो 1997 में न्यूज़ीलैंड जाकर बस गए। घर में क्रिकेट का माहौल हमेशा से रहा। रवि को क्रिकेट का शौक था और वे न्यूज़ीलैंड में भी क्लब मैचों में खेलते रहे।
नाम का क़िस्सा-
रचिन का नाम सुनकर लोगों को लगता है कि यह सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के नाम से जोड़कर बनाया गया है (“रा” राहुल से और “चिन” सचिन से)। मगर उनके पिता ने बताया कि यह महज एक संयोग था। रवि ने कहा, “जब बेटे का जन्म हुआ, तो मेरी पत्नी ने यह नाम सुझाया। हमें यह छोटा, आसान और प्यारा लगा, इसलिए तुरंत मान लिया। कुछ साल बाद ही हमें पता चला कि यह नाम दो क्रिकेटरों के नामों से मिलता-जुलता है। हमारा कोई इरादा नहीं था!”
क्रिकेट की शुरुआत-
पिता के शौक ने रचिन को भी क्रिकेट की तरफ खींचा। महज 5 साल की उम्र में ही उन्होंने बल्ला पकड़ लिया। हर साल गर्मियों में वे पिता के साथ बेंगलुरु जाते और वहां क्लब मैचों में हिस्सा लेते। यही प्रैक्टिस आगे चलकर उनके काम आई।
भारतीय पिचों पर सफलता का राज-
विश्व कप में भारत की पिचों पर शानदार प्रदर्शन के बारे में रचिन ने कहा, “मैं भाग्यशाली रहा कि बचपन से ही भारत आता रहा। किशोरावस्था में यहां की पिचों पर खेलने का अनुभव मिला, जिससे मुझे यहां के मैदानों को समझने में मदद मिली।”
रचिन रविंद्र का करियर
रचिन रविंद्र ने 2016 में सिर्फ 16 साल की उम्र में न्यूजीलैंड की अंडर-19 टीम के सबसे युवा खिलाड़ी बनकर वर्ल्ड कप खेला। दो साल बाद, 2018 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्हें ICC ने “भविष्य के सितारों” में गिना। इसी साल उन्होंने पाकिस्तान ए के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट (लिस्ट ए) की शुरुआत की।
2021 में उनका टेस्ट डेब्यू भारत के खिलाफ हुआ। कानपुर टेस्ट में नंबर 8 पर बैट करते हुए उन्होंने 91 गेंदों में 18* रन बनाकर मैच ड्रॉ कराने में मदद की। हालाँकि बांग्लादेश सीरीज़ (2023) में वे ज़्यादा रन न बना सके, लेकिन 2023 वनडे वर्ल्ड कप में उनका जलवा देखने लायक था। इसी वजह से ICC ने उन्हें 2023 का “उभरता क्रिकेटर” चुना।
रविंद्र ने 2022 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने पहले टेस्ट में ही 240 रन की धमाकेदार पारी खेली और 6 विकेट लेकर न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक जीत में भूमिका निभाई। मार्च 2024 में, 24 साल की उम्र में उन्हें न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा क्रिकेट सम्मान “रिचर्ड हेडली पुरस्कार” मिला।
शुरुआत में उनके आँकड़े औसत रहे, लेकिन 2023 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें न्यूजीलैंड क्रिकेट का भविष्य माना जाने लगा है। टी20, वनडे और टेस्ट – तीनों फॉर्मेट में उनकी प्रतिभा चमक रही है।
चैंपियंस ट्रॉफी 2025
जनवरी 2025 में, रचिन रविंद्र को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए न्यूजीलैंड टीम में चुना गया। हालाँकि, फरवरी की शुरुआत में पाकिस्तान-न्यूजीलैंड के बीच त्रिकोणीय सीरीज़ के पहले मैच में वे नहीं खेल पाए, क्योंकि वे चेहरे पर चोट लगने के बाद आराम कर रहे थे (हालाँकि उनकी टीम ने यह मैच जीत लिया)।
चैंपियंस ट्रॉफी के पहले मैच में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने ज़बरदस्त वापसी की। सिर्फ 105 गेंदों में बनाए 112 रनों ने उन्हें एक बड़ा रिकॉर्ड दिया – वे दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्होंने वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी दोनों टूर्नामेंट्स के अपने पहले ही मैच में शतक जड़कर इतिहास रच दिया।