Vladimir Putin की जीवनी: इतिहास, सत्ता, विदेश नीति, युद्ध और रणनीति: व्लादिमीर पुतिन रूस के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। केजीबी एजेंट से लेकर राष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर रणनीति, शक्ति और वैश्विक प्रभाव से भरा रहा है। उन्होंने रूस की विदेश नीति, सैन्य शक्ति और आंतरिक शासन को नए रूप में ढाला। यह लेख 2025 तक पुतिन के राजनीतिक जीवन, युद्ध निर्णयों और अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों की गहराई से पड़ताल करता है।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
व्लादिमीर व्लादिमीरोविच पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग), यूएसएसआर में हुआ। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से पड़े, और उन्होंने 1975 में लेनिनग्राद स्टेट यूनिवर्सिटी से विधि स्नातक की डिग्री प्राप्त की बाद में उन्हें अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि भी मिली।
केजीबी व शुरुआती कैरियर
1975–1990 के बीच पुतिन केजीबी (KGB) में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने पूर्वी जर्मनी में अंडरकवर कार्यों में भाग लिया । 1990 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, वे सेंट पीटर्सबर्ग की स्थानीय सरकार और राष्ट्रपति कार्यकारी कार्यालय में कार्य करते रहे।
राजनीतिक उदय और शुरुआती शक्तियाँ
1998 में पुतिन को एफएसबी (KGB का उत्तराधिकारी) का निदेशक नियुक्त किया गया। अगस्त 1999 में उन्हें रूसी प्रधानमंत्री और फिर 31 दिसंबर 1999 को राष्ट्रपति बोरीस येल्त्सिन के अचानक इस्तीफे के बाद—कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया ।
मार्च 2000 में पहले राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की। उसी वर्ष उन्होंने दूसरी चेचन अभियान शुरू की, जो लोकप्रियता लाने में मददगार साबित हुई
लगातार सत्ता की प्राप्ति और रूढ़ प्रबंधन
-
2000–2008 (पहले दो कार्यकाल): पुतिन ने केंद्र की सत्ता को मजबूत किया, आर्थिक स्थिरता लाई, लेकिन स्वतंत्र मीडिया पर नियंत्रण शुरू कर दिया—जैसे NTV पर छापा ।
-
2008–2012 (प्रधानमंत्री अवधि): चूंकि रूसी संविधान दो लगातार कार्यकालों की अनुमति देता था, पुतिन ने राष्ट्रपति पद छोड़ कर प्रधानमंत्री बने; इस दौरान दिमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति बने।
-
2012–2020: वे फिर से राष्ट्रपति बने, और सरकार ने सत्ता और मीडिया पर क़ब्ज़ा मजबूत किया; विरोधियों, NGOs, स्वतंत्र मीडिया पर अंकुश लगाया गया ।
-
2020 संवैधानिक संसोधन: इस संशोधन ने उनके पूर्व कार्यकाल को रीसेट कर दिया, जिससे उन्हें 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता मिल गया
पांचवीं राष्ट्रपति अवधि और सत्ता का धारणा
-
2024 मार्च में हुए चुनाव में, पुतिन ने लगभग 88% वोट पाकर पाँचवीं बार जीत दर्ज की। पश्चिमी मानवाधिकार समर्थकों ने इन चुनावों को “निष्पक्ष नहीं” करार दिया
-
7 मई 2024 को उनकी शपथ ग्रहण हुई—इस समारोह से अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों ने बहिष्कार कर दिया ।
आंतरिक नीतियाँ: नियंत्रण और दमन
पुतिन ने मीडिया, विपक्ष और सामाजिक समूहों पर नियंत्रण बढ़ाया: विपक्षी नेता जेल गए या निर्वासित हुए। NGOs “विदेशी एजेंट” घोषित हुए। LGBTQ+ कानून सख्त और विरोधी मीडिया बंद किए गए ।
2023 में ICC ने उन पर यूक्रेन से बच्चों के अपहरण का वारंट जारी किया ।
विदेश नीति और सैन्य गतिविधियाँ
-
2008: जॉर्जिया पर हमला, दक्षिण ओस्सेटिया और अब़खाज़िया को नियंत्रित किया ।
-
2014: क्रीमिया का अवैध एनकैनेशन, जिसके चलते पश्चिम ने प्रतिबंध लगाए
-
2015: सीरिया युद्ध में सक्रिय हस्तक्षेप—बशर अल-असद सरकार का समर्थन
-
2022-आजतक: यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर युद्ध, जिसने वैश्विक तनाव बढ़ाया; रूस पर प्रतिबंध और विश्व शक्ति समीकरण बदल गया ।
ताज़ा रणनीतिक गठबंधन
-
मई 2024: चीन की यात्रा—पहली विदेश यात्रा; चीन–रूस मजबूत रणनीतिक साझेदारी की घोषणा हुई
-
जनवरी 2025: ईरान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी का समझौता, रक्षा, ऊर्जा, वित्त सहित 20 वर्षों की सुविधा ।
-
फरवरी 2025: ट्रम्प से फोन वार्ता—यूएस और रूसी राष्ट्रपति के बीच 3 साल में पहली औपचारिक कॉल; यूक्रेन, AI, ऊर्जा, डॉलर जैसे विषयों पर चर्चा हुई ।
रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक छवि
विदेश नीति में पुतिन ने पश्चिम के प्रभुत्व को चुनौती दी, “बहु-केंद्रीय विश्व” का समर्थन किया ।
उनकी सैन्य नीतियाँ बेरहम रहीं—यूक्रेन में भारी मोर्चेबंदी (करीब 700,000 हताहत), परमाणु धमकी सहित ।
आर्थिक नीति और घरेलू अर्थव्यवस्था
तेल–गैस राजस्व से आर्थिक स्थिरता लाई, गरीबी में कमी हुई ।
लेकिन आर्थिक विषमता बढ़ी, पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने एशिया और आंतरिक स्वायत्तता की ओर झुकाव बढ़ाया ।
2024–25 में कोयला उद्योग में रक्षात्मक नीतियाँ शुरू कीं ।
प्रभाव, आलोचना और विरासत
पुतिन के आधिपत्य को रूस में प्रशंसा मिली—स्थिरता, राष्ट्रीय गौरव, विकास—but आंतरिक लोकतंत्र और मानवाधिकारों में गिरावट आई ।
अन्य संस्थाओं के दृष्टिकोण में, वे स्टालिन के बाद सबसे कम लोकतांत्रिक नेता हैं, जिन्होंने सत्ता, मीडिया और विपक्ष को दमन के द्वारा मजबूती से नियंत्रित किया ।
उनके आलोचक—नेवालनी, कारा-मुर्जा जैसे—गृह या निर्वासित—या मृत्यु (नवालनी) का सामना कर चुके हैं; अस्तित्वगत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने या तो भाग निकला या पत्रकारों पर अंकुश लगाया गया ।
हाल की गतिविधियाँ (2024–2025)
-
2024: कोरस सिटी हॉल आक्रमण (145 मरे); नक्सलवाद में रूस ने परमाणु धमकी जारी की
-
2024–25: ट्रम्प से बातचीत, ईरान-रूस संधि, कोयला नीतियाँ, विजय दिवस पर Xi-Jinping की उपस्थिति ।
-
2036 तक: संवैधानिक संशोधनों से पुतिन का कार्यकाल संभव – यदि वे निरंतर चुनाव जीतते रहे ।
निष्कर्ष
व्लादिमीर पुतिन का सफर—केजीबी से लेकर रूस के सबसे लंबे समय तक सत्ता में बने नेता तक—एक बेहद प्रभावशाली, विवादास्पद और दमनशील मार्ग रहा है। उन्होंने आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय गौरव, वैश्विक उपस्थिति और रणनीतिक गठबंधनों को बढ़ावा दिया, लेकिन लोकतंत्र और मानवाधिकारों की कीमत पर। 2025 तक, उनका शासन एक स्थिर लेकिन सख्त स्वरूप में जारी है, और उनका भविष्य—और रूस का—दुनिया को प्रभावित करता रहेगा।